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सुख-दुख

सुख दुख की रीत निराली रे।

यह आनी जानी।

तन के लिए हैं फेरे सारे,

मन के सब अनजाने रे,

तन की पीड़ा,सब सह लेते, 

मन की कही न जाती रे, 

यह आनी जानी। 

लोभ, मोह, माया के बंधन, 

सब पर भारी अभिमानी रे, 

अहंकार के नाद से मन रे, 

सब सुख है लुट जानी रे ,

यह आनी जानी।

Comments

  1. 👍👍👍👍very good👌👌👌

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