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बच्चे थे तो अच्छे थे

हम बच्चे थे तो अच्छे थे। 

छोटी सी दुनिया होती थी। 

नन्हे से सपने होते थे ।

छोटी हथेली,आधे टुकड़े से, 

भर जाती थी ।


तकरार बड़े थे ,प्यार भरे। 

जिनसे जुड़ते थे ,सच्चे थे। 

हम बच्चे थे तो अच्छे थे।

 

नन्हा मन, झूठे सपने से ,

सज  जाता था ।

सारी दुनिया आंखों के, 

आगे होती थी। 


कोई अपना दूर नहीं लगता था। 

जो भी कहते थे ,

बोल हमारे सच्चे थे। 

हम बच्चे थे तो अच्छे थे।

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