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स्मृति

स्मृति में रोज कुछ नया, 

जुड़ता है सहज, 

कभी यह होता नहीं खाली,

ना कभी एकांत, 

अतीत से दूर, 

स्वभाव से बोझिल, 

क्यों हुआ यह स्वर, 

सबके नयन में तस्वीर कभी, 

एक से बनते नहीं, 

स्मरण तुम्हें भी है, 

है मुझे भी, 

फिर क्यों कुछ अंतर है, 

किसी की कटु, 

दूसरे की मधुर है।

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